अब किससे शिकवा करें, जब अपना ही दिल बेवफाई कर गया?
कि उनका एक इशारा भी तुमसे दुनिया छीन ले।
जो अपना था वो कभी मेरा नहीं था, और जो मेरा था, वो कभी अपना नहीं बना।
तेरे साथ बिताए हर पल की यादें दिल में कहीं दबी हैं,
तू बेवफा था या हम ही फरेब खा गए, तेरे प्यार में दिल भी हारा और जान भी गवां बैठे।
जिंदगी भी अब हो गई है बेमकसद और नाराज़।
तू मेरे बिना खुश है तो मैं भी खुश हूँ, बस एक दर्द है कि अब मैं तेरी यादों में कैद हूँ।
दूर रहकर भी तेरी यादों से जूझ रहे हैं हम…!!!
न जाने कौन सी सजा दे गई मोहब्बत मुझको, कि तेरा होते हुए भी तेरा नहीं हूँ।
हमने निभाए थे रिश्ते, तुमने निभाए थे वादे,
मुझे रोता हुआ देखकर वो मुस्कुरा दिया, काश! मेरा दर्द ही मेरी खुशी होती।
पर सवाल ये है, वो हमारी यादों Sad Shayari में खोए क्या।
अब सोचते हैं, क्या तुमने कभी समझा क्या।
कभी-कभी खुद को ही खो देता हूँ, तेरी यादों में डूबकर।